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2030 में कनाडा: ग्रहों से संकेत

ये 2030 में कनाडा के लिए व्यापक संकेत हैं, उसी तरह पढ़े गए जैसे मेदिनी ज्योतिष किसी देश को पढ़ता है: हर वर्ष सूर्य के मेष में प्रवेश की कुंडली से, देश की स्थापना कुंडली से और वर्ष के ग्रहणों से। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।

इस पृष्ठ पर कनाडा की कोई स्थापना कुंडली नहीं ली गई है, इसलिए यह ओटावा के लिए बनी मेष संक्रांति कुंडली और ग्रहणों से पढ़ा गया है।

यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।

वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)

कुंडली का समय
लग्न
वृश्चिक (Scorpio)
वर्ष कुंडली का स्वामी
मंगल 6वें भाव में

सौर वर्ष 14 अप्रैल 2030 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण ओटावा के लिए बनी कुंडली में वृश्चिक लग्न उदित था।

मंगल लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह छठे भाव में है, जिससे पूरे वर्ष श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन पर ध्यान बना रहता है।

उभरकर दिखने वाले ग्रह

  • गुरु

    पहले भाव में गुरु से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में विकास, सहारा और व्यापक अवसर की प्रवृत्ति रहती है।

  • राहु

    पहले भाव में राहु से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में नई और अनोखी दिशाएँ, साथ में कुछ उलझन की प्रवृत्ति रहती है।

  • शुक्र

    चौथे भाव में शुक्र से भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल में सुविधा, कला और आसान समझौते की प्रवृत्ति रहती है।

  • शनि

    छठे भाव में शनि से श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन में धीमा, धैर्य भरा काम, कसा हुआ बजट और कुछ देरी की प्रवृत्ति रहती है।

  • केतु

    सातवें भाव में केतु से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में शांत, भीतर की ओर मोड़ और पुराने ढर्रों को छोड़ना की प्रवृत्ति रहती है।

  • चंद्र

    दसवें भाव में चंद्र से शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा में बदलती जन भावना और रोज़ की ज़रूरतों पर ध्यान की प्रवृत्ति रहती है।

स्थापना कुंडली

इस देश की स्थापना कुंडली नहीं पढ़ी जाती: इसका कोई तय समय नहीं है, या यह यहाँ की कुंडलियों की पहुँच से पुराना है।

राशि बदलने वाले ग्रह

  • गुरु का वृश्चिक (Scorpio) में प्रवेश

    24 जनवरी 2030 को गुरु वृश्चिक में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति)।

    यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।

  • शनि का वृषभ (Taurus) में प्रवेश

    16 अप्रैल 2030 को शनि वृषभ में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के सातवें भाव में (विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार)।

    यहाँ शनि इन विषयों में धैर्य, पुनर्गठन और सावधान बजट माँगता है।

  • गुरु का तुला (Libra) में प्रवेश

    1 मई 2030 को गुरु तुला में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के बारहवें भाव में (सार्वजनिक व्यय, विदेशी निवेश, बंदरगाह और पर्दे के पीछे का काम)।

    यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।

  • गुरु का वृश्चिक (Scorpio) में प्रवेश

    22 सितंबर 2030 को गुरु वृश्चिक में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति)।

    यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।

ग्रहण

  • सूर्य ग्रहण

    1 जून 2030 को वृषभ में सूर्य ग्रहण पड़ता है, यानी वर्ष कुंडली के सातवें भाव में (विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार)।

  • चंद्र ग्रहण

    15 जून 2030 को धनु में चंद्र ग्रहण पड़ता है, यानी वर्ष कुंडली के दूसरे भाव में (राष्ट्रीय संपदा, भंडार, खाद्य आपूर्ति और सार्वजनिक वाणी के स्वर)।

  • सूर्य ग्रहण

    25 नवंबर 2030 को वृश्चिक में सूर्य ग्रहण पड़ता है, यानी वर्ष कुंडली के पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति)।

ग्रहण के आसपास के सप्ताह उन विषयों में नए सार्वजनिक कार्य शुरू करने के बजाय समीक्षा करने और काम पूरे करने का समय माने जाते हैं।

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चंद्र राशि और शास्त्रीय नियमों से सामान्य मार्गदर्शन, व्यक्तिगत फलादेश नहीं, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह। आपके निर्णय आपके अपने हैं। इन भविष्यवाणियों का उपयोग कैसे करें, यह पढ़ें।