फ़रवरी 2022 में भारत: ग्रहों से संकेत
ये फ़रवरी 2022 में भारत के लिए व्यापक संकेत हैं, जो सूर्य के मेष प्रवेश की कुंडली, देश की स्थापना कुंडली और महीने के किसी ग्रहण से पढ़े गए हैं। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।
यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।
वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)
- कुंडली का समय
- लग्न
- मकर (Capricorn)
- वर्ष कुंडली का स्वामी
- शनि 1वें भाव में
सौर वर्ष 14 अप्रैल 2021 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण नई दिल्ली के लिए बनी कुंडली में मकर लग्न उदित था।
शनि लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह पहले भाव में है, जिससे पूरे वर्ष पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति पर ध्यान बना रहता है।
उभरकर दिखने वाले ग्रह
दूसरे भाव में गुरु से राष्ट्रीय संपदा, भंडार, खाद्य आपूर्ति और सार्वजनिक वाणी के स्वर में विकास, सहारा और व्यापक अवसर की प्रवृत्ति रहती है।
चौथे भाव में सूर्य से भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल में अधिकारियों का ध्यान और व्यवस्था पर ज़ोर की प्रवृत्ति रहती है।
चौथे भाव में चंद्र से भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल में बदलती जन भावना और रोज़ की ज़रूरतों पर ध्यान की प्रवृत्ति रहती है।
चौथे भाव में शुक्र से भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल में सुविधा, कला और आसान समझौते की प्रवृत्ति रहती है।
स्थापना कुंडली
- स्थापना
- 1947-08-15
- लग्न
- वृषभ (Taurus)
- चंद्र राशि
- कर्क (Cancer)
भारत की स्थापना कुंडली (15 अगस्त 1947) में वृषभ लग्न है और चंद्रमा कर्क में है।
शनि
शनि मकर में है: स्थापना कुंडली के लग्न से नौवें भाव में (उच्च शिक्षा, आस्था, लंबी यात्राएँ और दूर का व्यापार) और उसके चंद्रमा से सातवें भाव में।
यहाँ शनि इन विषयों में धैर्य, पुनर्गठन और सावधान बजट माँगता है।
गुरु
गुरु कुंभ में है: स्थापना कुंडली के लग्न से दसवें भाव में (शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा) और उसके चंद्रमा से आठवें भाव में।
यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।
राहु
राहु वृषभ में है: स्थापना कुंडली के लग्न से पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति) और उसके चंद्रमा से ग्यारहवें भाव में।
यहाँ राहु नए विचार और नई महत्वाकांक्षाएँ जगाता है, साथ में कुछ अनिश्चितता भी।
केतु
केतु वृश्चिक में है: स्थापना कुंडली के लग्न से सातवें भाव में (विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार) और उसके चंद्रमा से पाँचवें भाव में।
यहाँ केतु पुराने तरीकों की समीक्षा और शांत, भीतर की ओर मोड़ लाता है।
इस अवधि में कोई भी धीमा ग्रह राशि नहीं बदलता, इसलिए ऊपर के विषय स्थिर रहते हैं।
राशि बदलने वाले ग्रह
- सूर्य का कुंभ (Aquarius) में प्रवेश
13 फ़रवरी 2022 को सूर्य कुंभ में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के दसवें भाव में (शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा)।
सूर्य का यह महीना इन विषयों के सरकारी पक्ष को सामने लाता है।
- मंगल का मकर (Capricorn) में प्रवेश
26 फ़रवरी 2022 को मंगल मकर में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के नौवें भाव में (उच्च शिक्षा, आस्था, लंबी यात्राएँ और दूर का व्यापार)।
यहाँ मंगल चीज़ों को तेज़ करता है और सार्वजनिक बहस का तापमान बढ़ाता है।
ग्रहण
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं।
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं पड़ता।
चंद्र राशि और शास्त्रीय नियमों से सामान्य मार्गदर्शन, व्यक्तिगत फलादेश नहीं, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह। आपके निर्णय आपके अपने हैं। इन भविष्यवाणियों का उपयोग कैसे करें, यह पढ़ें।