अप्रैल 2030 में भारत: ग्रहों से संकेत
ये अप्रैल 2030 में भारत के लिए व्यापक संकेत हैं, जो सूर्य के मेष प्रवेश की कुंडली, देश की स्थापना कुंडली और महीने के किसी ग्रहण से पढ़े गए हैं। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।
यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।
वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)
- कुंडली का समय
- लग्न
- मिथुन (Gemini)
- वर्ष कुंडली का स्वामी
- बुध 11वें भाव में
सौर वर्ष 14 अप्रैल 2030 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण नई दिल्ली के लिए बनी कुंडली में मिथुन लग्न उदित था।
बुध लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह ग्यारहवें भाव में है, जिससे पूरे वर्ष विधि निर्माण, गठबंधन, लाभ और साझा आशाएँ पर ध्यान बना रहता है।
उभरकर दिखने वाले ग्रह
छठे भाव में गुरु से श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन में विकास, सहारा और व्यापक अवसर की प्रवृत्ति रहती है।
ग्यारहवें भाव में शनि से विधि निर्माण, गठबंधन, लाभ और साझा आशाएँ में धीमा, धैर्य भरा काम, कसा हुआ बजट और कुछ देरी की प्रवृत्ति रहती है।
स्थापना कुंडली
- स्थापना
- 1947-08-15
- लग्न
- वृषभ (Taurus)
- चंद्र राशि
- कर्क (Cancer)
भारत की स्थापना कुंडली (15 अगस्त 1947) में वृषभ लग्न है और चंद्रमा कर्क में है।
शनि
शनि मेष में है: स्थापना कुंडली के लग्न से बारहवें भाव में (सार्वजनिक व्यय, विदेशी निवेश, बंदरगाह और पर्दे के पीछे का काम) और उसके चंद्रमा से दसवें भाव में।
यहाँ शनि इन विषयों में धैर्य, पुनर्गठन और सावधान बजट माँगता है।
17 अप्रैल 2030 को शनि वृषभ में प्रवेश करता है: स्थापना कुंडली के लग्न से पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति) और उसके चंद्रमा से ग्यारहवें भाव में।
गुरु
गुरु वृश्चिक में है: स्थापना कुंडली के लग्न से सातवें भाव में (विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार) और उसके चंद्रमा से पाँचवें भाव में।
यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।
राहु
राहु वृश्चिक में है: स्थापना कुंडली के लग्न से सातवें भाव में (विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार) और उसके चंद्रमा से पाँचवें भाव में।
यहाँ राहु नए विचार और नई महत्वाकांक्षाएँ जगाता है, साथ में कुछ अनिश्चितता भी।
केतु
केतु वृषभ में है: स्थापना कुंडली के लग्न से पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति) और उसके चंद्रमा से ग्यारहवें भाव में।
यहाँ केतु पुराने तरीकों की समीक्षा और शांत, भीतर की ओर मोड़ लाता है।
राशि बदलने वाले ग्रह
- सूर्य का मेष (Aries) में प्रवेश
14 अप्रैल 2030 को सूर्य मेष में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के बारहवें भाव में (सार्वजनिक व्यय, विदेशी निवेश, बंदरगाह और पर्दे के पीछे का काम)।
सूर्य का यह महीना इन विषयों के सरकारी पक्ष को सामने लाता है।
ग्रहण
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं।
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं पड़ता।
चंद्र राशि और शास्त्रीय नियमों से सामान्य मार्गदर्शन, व्यक्तिगत फलादेश नहीं, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह। आपके निर्णय आपके अपने हैं। इन भविष्यवाणियों का उपयोग कैसे करें, यह पढ़ें।