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जुलाई 2043 में भारत: ग्रहों से संकेत

ये जुलाई 2043 में भारत के लिए व्यापक संकेत हैं, जो सूर्य के मेष प्रवेश की कुंडली, देश की स्थापना कुंडली और महीने के किसी ग्रहण से पढ़े गए हैं। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।

यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।

वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)

कुंडली का समय
लग्न
कन्या (Virgo)
वर्ष कुंडली का स्वामी
बुध 8वें भाव में

सौर वर्ष 14 अप्रैल 2043 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण नई दिल्ली के लिए बनी कुंडली में कन्या लग्न उदित था।

बुध लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह आठवें भाव में है, जिससे पूरे वर्ष साझा संसाधन, कर, बीमा और सार्वजनिक वित्त में अचानक बदलाव पर ध्यान बना रहता है।

उभरकर दिखने वाले ग्रह

  • केतु

    पहले भाव में केतु से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में शांत, भीतर की ओर मोड़ और पुराने ढर्रों को छोड़ना की प्रवृत्ति रहती है।

  • शनि

    दूसरे भाव में शनि से राष्ट्रीय संपदा, भंडार, खाद्य आपूर्ति और सार्वजनिक वाणी के स्वर में धीमा, धैर्य भरा काम, कसा हुआ बजट और कुछ देरी की प्रवृत्ति रहती है।

  • गुरु

    चौथे भाव में गुरु से भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल में विकास, सहारा और व्यापक अवसर की प्रवृत्ति रहती है।

  • सूर्य

    सातवें भाव में सूर्य से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में अधिकारियों का ध्यान और व्यवस्था पर ज़ोर की प्रवृत्ति रहती है।

  • मंगल

    सातवें भाव में मंगल से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में तेज़ी, जल्द निर्णय और बहस में कुछ गर्मी की प्रवृत्ति रहती है।

  • राहु

    सातवें भाव में राहु से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में नई और अनोखी दिशाएँ, साथ में कुछ उलझन की प्रवृत्ति रहती है।

  • चंद्र

    दसवें भाव में चंद्र से शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा में बदलती जन भावना और रोज़ की ज़रूरतों पर ध्यान की प्रवृत्ति रहती है।

स्थापना कुंडली

व्यापक रूप से माना गया स्थापना समय

स्थापना
1947-08-15
लग्न
वृषभ (Taurus)
चंद्र राशि
कर्क (Cancer)

भारत की स्थापना कुंडली (15 अगस्त 1947) में वृषभ लग्न है और चंद्रमा कर्क में है।

शनि

शनि तुला में है: स्थापना कुंडली के लग्न से छठे भाव में (श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन) और उसके चंद्रमा से चौथे भाव में।

यहाँ शनि इन विषयों में धैर्य, पुनर्गठन और सावधान बजट माँगता है।

गुरु

गुरु धनु में है: स्थापना कुंडली के लग्न से आठवें भाव में (साझा संसाधन, कर, बीमा और सार्वजनिक वित्त में अचानक बदलाव) और उसके चंद्रमा से छठे भाव में।

यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।

  • 30 जुलाई 2043 को गुरु वृश्चिक में प्रवेश करता है: स्थापना कुंडली के लग्न से सातवें भाव में (विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार) और उसके चंद्रमा से पाँचवें भाव में।

राहु

राहु मीन में है: स्थापना कुंडली के लग्न से ग्यारहवें भाव में (विधि निर्माण, गठबंधन, लाभ और साझा आशाएँ) और उसके चंद्रमा से नौवें भाव में।

यहाँ राहु नए विचार और नई महत्वाकांक्षाएँ जगाता है, साथ में कुछ अनिश्चितता भी।

केतु

केतु कन्या में है: स्थापना कुंडली के लग्न से पाँचवें भाव में (शिक्षा, युवा, कला, मनोरंजन और शेयर बाज़ार) और उसके चंद्रमा से तीसरे भाव में।

यहाँ केतु पुराने तरीकों की समीक्षा और शांत, भीतर की ओर मोड़ लाता है।

राशि बदलने वाले ग्रह

  • सूर्य का कर्क (Cancer) में प्रवेश

    17 जुलाई 2043 को सूर्य कर्क में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के तीसरे भाव में (संचार, मीडिया, परिवहन संपर्क और पड़ोसियों से व्यवहार)।

    सूर्य का यह महीना इन विषयों के सरकारी पक्ष को सामने लाता है।

  • मंगल का मिथुन (Gemini) में प्रवेश

    21 जुलाई 2043 को मंगल मिथुन में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के दूसरे भाव में (राष्ट्रीय संपदा, भंडार, खाद्य आपूर्ति और सार्वजनिक वाणी के स्वर)।

    यहाँ मंगल चीज़ों को तेज़ करता है और सार्वजनिक बहस का तापमान बढ़ाता है।

ग्रहण

इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं।

इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं पड़ता।

सभी देश

चंद्र राशि और शास्त्रीय नियमों से सामान्य मार्गदर्शन, व्यक्तिगत फलादेश नहीं, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह। आपके निर्णय आपके अपने हैं। इन भविष्यवाणियों का उपयोग कैसे करें, यह पढ़ें।