सितंबर 2000 में सिंगापुर: ग्रहों से संकेत
ये सितंबर 2000 में सिंगापुर के लिए व्यापक संकेत हैं, जो सूर्य के मेष प्रवेश की कुंडली, देश की स्थापना कुंडली और महीने के किसी ग्रहण से पढ़े गए हैं। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।
यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।
वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)
- कुंडली का समय
- लग्न
- तुला (Libra)
- वर्ष कुंडली का स्वामी
- शुक्र 6वें भाव में
सौर वर्ष 13 अप्रैल 2000 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण सिंगापुर के लिए बनी कुंडली में तुला लग्न उदित था।
शुक्र लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह छठे भाव में है, जिससे पूरे वर्ष श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन पर ध्यान बना रहता है।
उभरकर दिखने वाले ग्रह
चौथे भाव में केतु से भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल में शांत, भीतर की ओर मोड़ और पुराने ढर्रों को छोड़ना की प्रवृत्ति रहती है।
सातवें भाव में सूर्य से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में अधिकारियों का ध्यान और व्यवस्था पर ज़ोर की प्रवृत्ति रहती है।
सातवें भाव में मंगल से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में तेज़ी, जल्द निर्णय और बहस में कुछ गर्मी की प्रवृत्ति रहती है।
सातवें भाव में गुरु से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में विकास, सहारा और व्यापक अवसर की प्रवृत्ति रहती है।
सातवें भाव में शनि से विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार में धीमा, धैर्य भरा काम, कसा हुआ बजट और कुछ देरी की प्रवृत्ति रहती है।
दसवें भाव में चंद्र से शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा में बदलती जन भावना और रोज़ की ज़रूरतों पर ध्यान की प्रवृत्ति रहती है।
दसवें भाव में राहु से शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा में नई और अनोखी दिशाएँ, साथ में कुछ उलझन की प्रवृत्ति रहती है।
स्थापना कुंडली
- स्थापना
- 1965-08-09
- लग्न
- कन्या (Virgo)
- चंद्र राशि
- धनु (Sagittarius)
सिंगापुर की स्थापना कुंडली (9 अगस्त 1965) में कन्या लग्न है और चंद्रमा धनु में है।
शनि
शनि वृषभ में है: स्थापना कुंडली के लग्न से नौवें भाव में (उच्च शिक्षा, आस्था, लंबी यात्राएँ और दूर का व्यापार) और उसके चंद्रमा से छठे भाव में।
यहाँ शनि इन विषयों में धैर्य, पुनर्गठन और सावधान बजट माँगता है।
गुरु
गुरु वृषभ में है: स्थापना कुंडली के लग्न से नौवें भाव में (उच्च शिक्षा, आस्था, लंबी यात्राएँ और दूर का व्यापार) और उसके चंद्रमा से छठे भाव में।
यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।
राहु
राहु मिथुन में है: स्थापना कुंडली के लग्न से दसवें भाव में (शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा) और उसके चंद्रमा से सातवें भाव में।
यहाँ राहु नए विचार और नई महत्वाकांक्षाएँ जगाता है, साथ में कुछ अनिश्चितता भी।
केतु
केतु धनु में है: स्थापना कुंडली के लग्न से चौथे भाव में (भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल) और उसके चंद्रमा से पहले भाव में।
यहाँ केतु पुराने तरीकों की समीक्षा और शांत, भीतर की ओर मोड़ लाता है।
इस अवधि में कोई भी धीमा ग्रह राशि नहीं बदलता, इसलिए ऊपर के विषय स्थिर रहते हैं।
राशि बदलने वाले ग्रह
- मंगल का सिंह (Leo) में प्रवेश
7 सितंबर 2000 को मंगल सिंह में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के बारहवें भाव में (सार्वजनिक व्यय, विदेशी निवेश, बंदरगाह और पर्दे के पीछे का काम)।
यहाँ मंगल चीज़ों को तेज़ करता है और सार्वजनिक बहस का तापमान बढ़ाता है।
- सूर्य का कन्या (Virgo) में प्रवेश
16 सितंबर 2000 को सूर्य कन्या में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति)।
सूर्य का यह महीना इन विषयों के सरकारी पक्ष को सामने लाता है।
ग्रहण
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं।
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं पड़ता।
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