जनवरी 2003 में यूनाइटेड किंगडम: ग्रहों से संकेत
ये जनवरी 2003 में यूनाइटेड किंगडम के लिए व्यापक संकेत हैं, जो सूर्य के मेष प्रवेश की कुंडली, देश की स्थापना कुंडली और महीने के किसी ग्रहण से पढ़े गए हैं। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।
इस पृष्ठ पर यूनाइटेड किंगडम की कोई स्थापना कुंडली नहीं ली गई है, इसलिए यह लंदन के लिए बनी मेष संक्रांति कुंडली और ग्रहणों से पढ़ा गया है।
यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।
वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)
- कुंडली का समय
- लग्न
- धनु (Sagittarius)
- वर्ष कुंडली का स्वामी
- गुरु 7वें भाव में
सौर वर्ष 14 अप्रैल 2002 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण लंदन के लिए बनी कुंडली में धनु लग्न उदित था।
गुरु लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह सातवें भाव में है, जिससे पूरे वर्ष विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार पर ध्यान बना रहता है।
उभरकर दिखने वाले ग्रह
छठे भाव में शनि से श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन में धीमा, धैर्य भरा काम, कसा हुआ बजट और कुछ देरी की प्रवृत्ति रहती है।
स्थापना कुंडली
इस देश की स्थापना कुंडली नहीं पढ़ी जाती: इसका कोई तय समय नहीं है, या यह यहाँ की कुंडलियों की पहुँच से पुराना है।
राशि बदलने वाले ग्रह
- मंगल का वृश्चिक (Scorpio) में प्रवेश
7 जनवरी 2003 को मंगल वृश्चिक में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के बारहवें भाव में (सार्वजनिक व्यय, विदेशी निवेश, बंदरगाह और पर्दे के पीछे का काम)।
यहाँ मंगल चीज़ों को तेज़ करता है और सार्वजनिक बहस का तापमान बढ़ाता है।
- शनि का वृषभ (Taurus) में प्रवेश
8 जनवरी 2003 को शनि वृषभ में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के छठे भाव में (श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन)।
यहाँ शनि इन विषयों में धैर्य, पुनर्गठन और सावधान बजट माँगता है।
- सूर्य का मकर (Capricorn) में प्रवेश
14 जनवरी 2003 को सूर्य मकर में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के दूसरे भाव में (राष्ट्रीय संपदा, भंडार, खाद्य आपूर्ति और सार्वजनिक वाणी के स्वर)।
सूर्य का यह महीना इन विषयों के सरकारी पक्ष को सामने लाता है।
ग्रहण
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं।
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं पड़ता।
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