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जनवरी 2004 में यूनाइटेड किंगडम: ग्रहों से संकेत

ये जनवरी 2004 में यूनाइटेड किंगडम के लिए व्यापक संकेत हैं, जो सूर्य के मेष प्रवेश की कुंडली, देश की स्थापना कुंडली और महीने के किसी ग्रहण से पढ़े गए हैं। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।

इस पृष्ठ पर यूनाइटेड किंगडम की कोई स्थापना कुंडली नहीं ली गई है, इसलिए यह लंदन के लिए बनी मेष संक्रांति कुंडली और ग्रहणों से पढ़ा गया है।

यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।

वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)

कुंडली का समय
लग्न
मेष (Aries)
वर्ष कुंडली का स्वामी
मंगल 10वें भाव में

सौर वर्ष 14 अप्रैल 2003 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण लंदन के लिए बनी कुंडली में मेष लग्न उदित था।

मंगल लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह दसवें भाव में है, जिससे पूरे वर्ष शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा पर ध्यान बना रहता है।

उभरकर दिखने वाले ग्रह

  • सूर्य

    पहले भाव में सूर्य से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में अधिकारियों का ध्यान और व्यवस्था पर ज़ोर की प्रवृत्ति रहती है।

  • बुध

    पहले भाव में बुध से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में व्यस्त बातचीत, कागज़ी काम और तेज़ व्यापार की प्रवृत्ति रहती है।

  • शनि

    तीसरे भाव में शनि से संचार, मीडिया, परिवहन संपर्क और पड़ोसियों से व्यवहार में धीमा, धैर्य भरा काम, कसा हुआ बजट और कुछ देरी की प्रवृत्ति रहती है।

  • गुरु

    चौथे भाव में गुरु से भूमि, आवास, खेती, मौसम और घरेलू माहौल में विकास, सहारा और व्यापक अवसर की प्रवृत्ति रहती है।

स्थापना कुंडली

इस देश की स्थापना कुंडली नहीं पढ़ी जाती: इसका कोई तय समय नहीं है, या यह यहाँ की कुंडलियों की पहुँच से पुराना है।

राशि बदलने वाले ग्रह

  • सूर्य का मकर (Capricorn) में प्रवेश

    14 जनवरी 2004 को सूर्य मकर में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के दसवें भाव में (शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा)।

    सूर्य का यह महीना इन विषयों के सरकारी पक्ष को सामने लाता है।

  • मंगल का मेष (Aries) में प्रवेश

    24 जनवरी 2004 को मंगल मेष में प्रवेश करता है, यानी वर्ष कुंडली के पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति)।

    यहाँ मंगल चीज़ों को तेज़ करता है और सार्वजनिक बहस का तापमान बढ़ाता है।

ग्रहण

इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं।

इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं पड़ता।

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