गुरु वृश्चिक राशि में 2030
25 जनवरी 2030 से 15 अक्टूबर 2031 तक
गुरु 25 जनवरी 2030 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है। धीमे ग्रह का राशि परिवर्तन हर चंद्र राशि के साल पर असर डालता है, हर एक के अपने भाव में; नीचे बारहों राशियों के लिए इसे पढ़ा गया है।
गुरु के गोचर विकास, मार्गदर्शन और अच्छी सलाह के बारे में हैं। जहाँ से गुरु गुज़रता है, वहाँ मदद और अवसर अधिक सहजता से आते हैं।
तिथियाँ
गुरु 15 अक्टूबर 2031 को अंतिम बार वृश्चिक राशि छोड़ता है।
अपनी वक्री चाल में गुरु यह सीमा एक से अधिक बार पार करता है। यह वृश्चिक राशि में 25 जनवरी 2030 से 1 मई 2030 तक, 23 सितंबर 2030 से 17 फ़रवरी 2031 तक और 14 जून 2031 से 15 अक्टूबर 2031 तक रहता है।
अलग-अलग अवधियाँ
- 125 जनवरी 2030 से 1 मई 2030 तक
- 223 सितंबर 2030 से 17 फ़रवरी 2031 तक
- 314 जून 2031 से 15 अक्टूबर 2031 तक
चाल बदलने की तिथियाँ
- 13 मार्च 2030वक्री: 13 मार्च 2030: गुरु वृश्चिक राशि में वक्री होता है।
- 16 अगस्त 2031मार्गी: 16 अगस्त 2031: गुरु वृश्चिक राशि में मार्गी होता है।
हर चंद्र राशि के लिए इसका अर्थ
मेष (Aries)
सावधानीमेष: गुरु आपके आठवें भाव में
आठवें भाव में गुरु रुकावटें और अप्रत्याशित खर्च ला सकता है। जोखिम भरे कामों से बचें और विवादों से दूर रहें।
वृषभ (Taurus)
शुभवृषभ: गुरु आपके सातवें भाव में
सातवें भाव में गुरु विवाह, साझेदारी और अच्छी संगति के लिए अनुकूल है। समझौतों और यात्रा के लिए सहायक समय है।
मिथुन (Gemini)
सावधानीमिथुन: गुरु आपके छठे भाव में
छठे भाव में गुरु प्रतिद्वंद्वी और रुके काम या कर्ज़ का दबाव ला सकता है। उधार देने से बचें और अपनी बात पर टिके रहें।
कर्क (Cancer)
शुभकर्क: गुरु आपके पाँचवें भाव में
पाँचवें भाव में गुरु पढ़ाई, बच्चों और रचनात्मक काम के लिए अनुकूल है। सही निर्णय और ज्ञानी लोगों का साथ मिलता है।
सिंह (Leo)
सावधानीसिंह: गुरु आपके चौथे भाव में
चौथे भाव में गुरु घर या पारिवारिक मामलों को लेकर चिंता ला सकता है। धैर्य और दया से बातें संभली रहती हैं।
कन्या (Virgo)
सावधानीकन्या: गुरु आपके तीसरे भाव में
तीसरे भाव में गुरु प्रयासों को धीमा कर सकता है और स्थान परिवर्तन ला सकता है। योजनाएँ लचीली रखें और स्थिरता से आगे बढ़ें।
तुला (Libra)
शुभतुला: गुरु आपके दूसरे भाव में
दूसरे भाव में गुरु धन और परिवार के लिए अनुकूल है। बचत बढ़ती है और आपकी बात का वज़न होता है।
वृश्चिक (Scorpio)
सावधानीवृश्चिक: गुरु आपके पहले भाव में
आपकी अपनी राशि में गुरु अटके होने या घर से दूर होने का भाव ला सकता है। आस्था रखें, जल्दबाज़ी में बड़े बदलाव से बचें और योजनाओं को पकने दें।
धनु (Sagittarius)
सावधानीधनु: गुरु आपके बारहवें भाव में
बारहवें भाव में गुरु खर्च बढ़ा सकता है और भटकाव का भाव ला सकता है। साधना और दान के लिए अच्छा, बड़ी ख़रीदारी के लिए कम।
मकर (Capricorn)
शुभमकर: गुरु आपके ग्यारहवें भाव में
ग्यारहवें भाव में गुरु लाभ, पहचान और इच्छापूर्ति लाता है। मित्र और वरिष्ठ मदद करते हैं।
कुंभ (Aquarius)
सावधानीकुंभ: गुरु आपके दसवें भाव में
दसवें भाव में गुरु काम में बदलाव और तनाव ला सकता है। अपनी साख की रक्षा करें और शॉर्टकट से बचें।
मीन (Pisces)
शुभमीन: गुरु आपके नौवें भाव में
नौवें भाव में गुरु आस्था, उच्च शिक्षा और सौभाग्य के लिए अनुकूल है। बड़े और गुरुजन साथ देते हैं।
हर पंक्ति गुरु को अकेले पढ़ती है। साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक राशिफल में इसे बाकी ग्रहों के साथ तौला जाता है, और आपकी अपनी जन्म कुंडली अलग बात कह सकती है।
ये फल केवल चंद्र राशि पर आधारित हैं। जन्म समय के साथ आपकी अपनी कुंडली इससे कहीं अधिक बताती है।
चंद्र राशि और शास्त्रीय नियमों से सामान्य मार्गदर्शन, व्यक्तिगत फलादेश नहीं, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह। आपके निर्णय आपके अपने हैं। इन भविष्यवाणियों का उपयोग कैसे करें, यह पढ़ें।