जनवरी 2030 में ऑस्ट्रेलिया: ग्रहों से संकेत
ये जनवरी 2030 में ऑस्ट्रेलिया के लिए व्यापक संकेत हैं, जो सूर्य के मेष प्रवेश की कुंडली, देश की स्थापना कुंडली और महीने के किसी ग्रहण से पढ़े गए हैं। ये सार्वजनिक जीवन की प्रवृत्तियाँ बताते हैं, तय घटनाएँ नहीं।
यहाँ मेदिनी फल केवल विषयों और समय की अवधियों तक सीमित है। यह किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहता और किसी विशेष घटना का नाम लेने का प्रयास नहीं करता।
वर्ष कुंडली (मेष संक्रांति)
- कुंडली का समय
- लग्न
- मेष (Aries)
- वर्ष कुंडली का स्वामी
- मंगल 6वें भाव में
सौर वर्ष 14 अप्रैल 2029 को आरंभ हुआ, जब सूर्य ने मेष में प्रवेश किया। उस क्षण कैनबरा के लिए बनी कुंडली में मेष लग्न उदित था।
मंगल लग्न राशि का स्वामी है, इसलिए वही वर्ष कुंडली का स्वर तय करता है। वह छठे भाव में है, जिससे पूरे वर्ष श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन पर ध्यान बना रहता है।
उभरकर दिखने वाले ग्रह
पहले भाव में सूर्य से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में अधिकारियों का ध्यान और व्यवस्था पर ज़ोर की प्रवृत्ति रहती है।
पहले भाव में चंद्र से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में बदलती जन भावना और रोज़ की ज़रूरतों पर ध्यान की प्रवृत्ति रहती है।
पहले भाव में बुध से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में व्यस्त बातचीत, कागज़ी काम और तेज़ व्यापार की प्रवृत्ति रहती है।
पहले भाव में शुक्र से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में सुविधा, कला और आसान समझौते की प्रवृत्ति रहती है।
पहले भाव में शनि से पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति में धीमा, धैर्य भरा काम, कसा हुआ बजट और कुछ देरी की प्रवृत्ति रहती है।
छठे भाव में गुरु से श्रमबल, सार्वजनिक सेवाएँ, सरकारी ऋण और रोज़मर्रा का प्रशासन में विकास, सहारा और व्यापक अवसर की प्रवृत्ति रहती है।
स्थापना कुंडली
- स्थापना
- 1901-01-01
- लग्न
- मेष (Aries)
- चंद्र राशि
- मेष (Aries)
ऑस्ट्रेलिया की स्थापना कुंडली (1 जनवरी 1901) में मेष लग्न है और चंद्रमा मेष में है।
शनि
शनि मेष में है: स्थापना कुंडली के लग्न से पहले भाव में (पूरे देश और उसके लोगों की सामान्य मनःस्थिति) और उसके चंद्रमा से पहले भाव में।
यहाँ शनि इन विषयों में धैर्य, पुनर्गठन और सावधान बजट माँगता है।
गुरु
गुरु तुला में है: स्थापना कुंडली के लग्न से सातवें भाव में (विदेश संबंध, संधियाँ और व्यापारिक साझेदार) और उसके चंद्रमा से सातवें भाव में।
यहाँ गुरु इन विषयों में विकास और सोची-समझी योजना को सहारा देता है।
25 जनवरी 2030 को गुरु वृश्चिक में प्रवेश करता है: स्थापना कुंडली के लग्न से आठवें भाव में (साझा संसाधन, कर, बीमा और सार्वजनिक वित्त में अचानक बदलाव) और उसके चंद्रमा से आठवें भाव में।
राहु
राहु धनु में है: स्थापना कुंडली के लग्न से नौवें भाव में (उच्च शिक्षा, आस्था, लंबी यात्राएँ और दूर का व्यापार) और उसके चंद्रमा से नौवें भाव में।
यहाँ राहु नए विचार और नई महत्वाकांक्षाएँ जगाता है, साथ में कुछ अनिश्चितता भी।
केतु
केतु मिथुन में है: स्थापना कुंडली के लग्न से तीसरे भाव में (संचार, मीडिया, परिवहन संपर्क और पड़ोसियों से व्यवहार) और उसके चंद्रमा से तीसरे भाव में।
यहाँ केतु पुराने तरीकों की समीक्षा और शांत, भीतर की ओर मोड़ लाता है।
राशि बदलने वाले ग्रह
- मंगल का कुंभ (Aquarius) में प्रवेश
13 जनवरी 2030 को मंगल कुंभ में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के ग्यारहवें भाव में (विधि निर्माण, गठबंधन, लाभ और साझा आशाएँ)।
यहाँ मंगल चीज़ों को तेज़ करता है और सार्वजनिक बहस का तापमान बढ़ाता है।
- सूर्य का मकर (Capricorn) में प्रवेश
14 जनवरी 2030 को सूर्य मकर में प्रवेश करता है, यानी स्थापना कुंडली के दसवें भाव में (शासन, संस्थाएँ और दुनिया में देश की प्रतिष्ठा)।
सूर्य का यह महीना इन विषयों के सरकारी पक्ष को सामने लाता है।
ग्रहण
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं।
इस अवधि में कोई ग्रहण नहीं पड़ता।
चंद्र राशि और शास्त्रीय नियमों से सामान्य मार्गदर्शन, व्यक्तिगत फलादेश नहीं, और न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह। आपके निर्णय आपके अपने हैं। इन भविष्यवाणियों का उपयोग कैसे करें, यह पढ़ें।