मेष (Aries) वार्षिक राशिफल 2011 - मिश्रित
मेष चंद्र राशि का 2011 का वार्षिक राशिफल। साल का रूप मुख्य रूप से धीमे ग्रह तय करते हैं: गुरु, शनि, राहु और केतु, और साल के ग्रहण। यहाँ हर एक को उसकी तिथियों के साथ आपकी चंद्र राशि से पढ़ा गया है।
यह साल मिला-जुला है: कुछ काम आसानी से चलते हैं और कुछ में धैर्य चाहिए। जो चल रहा है उस पर भरोसा रखें और धीमे कामों को एक-एक कदम लें।
साल कैसा रहेगा
साल का पहला भाग: 1 जनवरी से 30 जून
शुभयह समय कुल मिलाकर साथ देने वाला लगता है।
शनि यहाँ आपके पक्ष में काम करता है और रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम में मदद करता है।
गुरु, राहु और केतु कहते हैं कि खर्च, आराम और भीतर का जीवन के साथ-साथ आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास में सावधानी से चलें।
केतु मेहनत, साहस और छोटी यात्राएँ में मदद करना चाहता है, पर अभी रुका हुआ है, इसलिए नतीजे धीरे आएँगे।
4 जनवरी, 26 जनवरी, 8 मई, 2 जून, 6 जून, 13 जून और 16 जून के आसपास बदलाव आता है; नीचे ध्यान देने योग्य तिथियाँ देखें।
साल का दूसरा भाग: 1 जुलाई से 31 दिसंबर
मिश्रितयह समय आसानी और धीमी गति का मेल है।
शनि यहाँ आपके पक्ष में काम करता है और रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम में मदद करता है।
शनि, गुरु, राहु और केतु कहते हैं कि साझेदारी और दूसरों से लेन-देन के साथ-साथ आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास में सावधानी से चलें।
1 जुलाई, 30 अगस्त, 15 नवंबर, 25 नवंबर, 10 दिसंबर और 26 दिसंबर के आसपास बदलाव आता है; नीचे ध्यान देने योग्य तिथियाँ देखें।
शनि आपके छठे भाव में
शुभजीवन के क्षेत्र:करियर
शनि 15 नवंबर 2011 तक कन्या राशि में है।
शनि मेहनत, अनुशासन, कर्तव्य और धैर्य का प्रतीक है। वह लगातार मेहनत का फल देता है और शॉर्टकट को धीमा करता है।
छठे भाव में शनि प्रतिद्वंद्वियों, कर्ज़ और लंबे समय से रुके काम पर जीत दिलाता है। लगातार सेवा का फल मिलता है।
आपके लिए इसका अर्थ
- करियर: काम पर ध्यान जाता है; ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेने या विचार रखने का अच्छा समय।
शनि आपके सातवें भाव में
सावधानीजीवन के क्षेत्र:रिश्ते
शनि 15 नवंबर 2011 को तुला राशि में प्रवेश करता है।
शनि मेहनत, अनुशासन, कर्तव्य और धैर्य का प्रतीक है। वह लगातार मेहनत का फल देता है और शॉर्टकट को धीमा करता है।
सातवें भाव में शनि साझेदारी में दूरी या खिंचाव और समझौतों में देरी ला सकता है। धैर्य और निष्पक्षता सहायक हैं।
आपके लिए इसका अर्थ
- रिश्ते: ग़लतफ़हमी आसानी से हो सकती है; ज़्यादा सुनें और दूसरों को जगह दें।
गुरु आपके बारहवें भाव में
सावधानीजीवन के क्षेत्र:आध्यात्मिक जीवनधन
गुरु 8 मई 2011 तक मीन राशि में है।
गुरु विकास, ज्ञान, मार्गदर्शन, सौभाग्य, संतान और शिक्षकों का प्रतीक है। साल का सबसे बड़ा सहायक यही है।
बारहवें भाव में गुरु खर्च बढ़ा सकता है और भटकाव का भाव ला सकता है। साधना और दान के लिए अच्छा, बड़ी ख़रीदारी के लिए कम।
आपके लिए इसका अर्थ
- आध्यात्मिक जीवन: मन उदास या अशांत लग सकता है; शांत दिनचर्या और प्रार्थना मन को स्थिर करती है।
- धन: खर्च बढ़ सकता है; बड़ी ख़रीद, उधार देने और जोखिम भरे दाँव से बचें।
गुरु आपके पहले भाव में
सावधानी
गुरु 8 मई 2011 को मेष राशि में प्रवेश करता है।
गुरु विकास, ज्ञान, मार्गदर्शन, सौभाग्य, संतान और शिक्षकों का प्रतीक है। साल का सबसे बड़ा सहायक यही है।
आपकी अपनी राशि में गुरु अटके होने या घर से दूर होने का भाव ला सकता है। आस्था रखें, जल्दबाज़ी में बड़े बदलाव से बचें और योजनाओं को पकने दें।
आपके लिए इसका अर्थ
- आप: मन और ऊर्जा कम हो सकते हैं; अच्छा आराम करें और जल्दबाज़ी में प्रतिक्रिया न दें।
राहु आपके नौवें भाव में
सावधानीजीवन के क्षेत्र:पढ़ाईआध्यात्मिक जीवन
राहु 6 जून 2011 तक धनु राशि में है।
राहु महत्वाकांक्षा, और पाने की भूख, नए और अनोखे का प्रतीक है। वह अचानक अवसर और बेचैनी ला सकता है।
नौवें भाव में राहु आस्था को डगमगा सकता है या गुरुओं और बड़ों से मतभेद ला सकता है। जो जानते हैं, उस पर टिके रहें।
आपके लिए इसका अर्थ
- पढ़ाई: ध्यान बिखर सकता है; एक समय में एक विषय लें और अच्छे से दोहराएँ।
- आध्यात्मिक जीवन: मन उदास या अशांत लग सकता है; शांत दिनचर्या और प्रार्थना मन को स्थिर करती है।
राहु आपके आठवें भाव में
सावधानीजीवन के क्षेत्र:धन
राहु 6 जून 2011 को वृश्चिक राशि में प्रवेश करता है।
राहु महत्वाकांक्षा, और पाने की भूख, नए और अनोखे का प्रतीक है। वह अचानक अवसर और बेचैनी ला सकता है।
आठवें भाव में राहु अचानक बदलावों और साझा धन में सावधानी माँगता है। गोपनीयता और जोखिम भरी योजनाओं से बचें।
आपके लिए इसका अर्थ
- धन: खर्च बढ़ सकता है; बड़ी ख़रीद, उधार देने और जोखिम भरे दाँव से बचें।
केतु आपके तीसरे भाव में
रुका हुआजीवन के क्षेत्र:करियर
केतु 6 जून 2011 तक मिथुन राशि में है।
केतु छोड़ने, वैराग्य और भीतर के जीवन का प्रतीक है। वह शांत समझ और सांसारिक बातों से दूर होने का खिंचाव ला सकता है।
तीसरे भाव में केतु दृढ़ता और मेहनत से सफलता लाता है। साहस और व्यावहारिक हुनर का फल मिलता है।
फ़िलहाल गुरु केतु के शुभ फल में बाधा (वेध) डाल रहा है, इसलिए मेहनत के नतीजे दिखने में अधिक समय लग सकता है।
आपके लिए इसका अर्थ
- करियर: साथ तो है, पर पहचान उम्मीद से धीरे मिलती है।
केतु आपके दूसरे भाव में
सावधानीजीवन के क्षेत्र:धनपरिवार और घर
केतु 6 जून 2011 को वृषभ राशि में प्रवेश करता है।
केतु छोड़ने, वैराग्य और भीतर के जीवन का प्रतीक है। वह शांत समझ और सांसारिक बातों से दूर होने का खिंचाव ला सकता है।
दूसरे भाव में केतु लापरवाह शब्द और अस्थिर धन ला सकता है। बोलने से पहले सोचें और बचत सुरक्षित रखें।
आपके लिए इसका अर्थ
- धन: खर्च बढ़ सकता है; बड़ी ख़रीद, उधार देने और जोखिम भरे दाँव से बचें।
- परिवार और घर: घर में छोटी-मोटी खटपट संभव है; धैर्य और मीठे शब्द काम आते हैं।
शनि, साढ़ेसाती और ढैय्या
इस अवधि में आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या नहीं है।
इस साल का उपाय
उन ग्रहों के लिए छोटे, स्वैच्छिक अभ्यास जो इस साल सबसे ज़्यादा सावधानी माँगते हैं। इनमें कोई ख़र्च नहीं है और ये किसी ख़ास नतीजे का वादा नहीं करते; जो ठीक लगे वही अपनाएँ।
गुरु के लिए, गुरुवार को सबसे अच्छा
गुरु आपके लिए कठिन स्थान में है, जिसका असर आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास पर है।
- ज़रूरत से ज़्यादा वादे करने और खुद पर क्षमता से ज़्यादा बोझ लेने से बचें; उतने ही वादे करें जितने निभा सकें।
- बड़े फ़ैसलों से पहले किसी भरोसेमंद बड़े की सलाह लें।
राहु के लिए, शनिवार को सबसे अच्छा
राहु आपके लिए कठिन स्थान में है, जिसका असर साझा धन और अचानक बदलाव पर है।
- शॉर्टकट और आधे-अधूरे सच से बचें, चाहे वे छोटे ही क्यों न हों।
- बेचैनी में फ़ोन स्क्रॉल करना और ख़बरें देखना सीमित करें; सीधे-सादे, मन को टिकाने वाले कामों में समय लगाएँ।
ध्यान देने योग्य तिथियाँ
- 4 जनवरी 2011
सूर्य ग्रहण: 4 जनवरी 2011: धनु राशि में, आपके नौवें भाव में सूर्यग्रहण। दिन शांति से बिताएँ और नई शुरुआत से बचें।
ग्रहण बड़े-बुज़ुर्ग, शिक्षक, आस्था और लंबी यात्राएँ पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।
क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।
- 26 जनवरी 2011
वक्री: 26 जनवरी 2011: शनि कन्या राशि में, आपके छठे भाव में वक्री होता है। नई शुरुआत के बजाय समीक्षा का समय।
शनि रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम पर धीमा होता है, इसलिए इस क्षेत्र की पुरानी बातें दोबारा सामने आती हैं।
क्या करें: कुछ नया शुरू करने के बजाय पुराना काम दोहराएँ, सुधारें और पूरा करें।
- 8 मई 2011
राशि परिवर्तन: 8 मई 2011: गुरु मेष राशि में, आपके पहले भाव में प्रवेश करता है।
गुरु आपके लिए कठिन स्थान में आता है, जिसका असर आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास पर होता है।
क्या करें: इस तिथि से इस क्षेत्र में धीरे चलें और हामी भरने से पहले दोबारा जाँच लें।
- 2 जून 2011
सूर्य ग्रहण: 2 जून 2011: वृषभ राशि में, आपके दूसरे भाव में सूर्यग्रहण। दिन शांति से बिताएँ और नई शुरुआत से बचें।
ग्रहण धन, परिवार और वाणी पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।
क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।
- 6 जून 2011
राशि परिवर्तन: 6 जून 2011: राहु वृश्चिक राशि (आपके आठवें भाव) में और केतु वृषभ राशि (आपके दूसरे भाव) में प्रवेश करता है।
राहु-केतु की जोड़ी आगे बढ़ती है, जिससे बदलता है कि आप कहाँ बेचैनी महसूस करते हैं (साझा धन और अचानक बदलाव) और कहाँ आपसे छोड़ने को कहा जाता है (धन, परिवार और वाणी)।
क्या करें: ख़ुद को सँभलने का समय दें और इसके आसपास के हफ़्तों में अचानक बड़े बदलावों से बचें।
- 13 जून 2011
मार्गी: 13 जून 2011: शनि कन्या राशि में, आपके छठे भाव में मार्गी होता है। रुके हुए काम फिर आगे बढ़ने लगते हैं।
शनि रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम पर फिर आगे बढ़ता है, इसलिए यहाँ जो अटका था वह चलने लगता है।
क्या करें: रुका हुआ काम फिर शुरू करें, और हस्ताक्षर या शुरुआत से पहले एक-दो दिन रुकें।
- 16 जून 2011
चंद्र ग्रहण: 16 जून 2011: धनु राशि में, आपके नौवें भाव में चंद्रग्रहण। दिन शांत रखें और बड़े फ़ैसलों से बचें।
ग्रहण बड़े-बुज़ुर्ग, शिक्षक, आस्था और लंबी यात्राएँ पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।
क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।
- 1 जुलाई 2011
सूर्य ग्रहण: 1 जुलाई 2011: मिथुन राशि में, आपके तीसरे भाव में सूर्यग्रहण। दिन शांति से बिताएँ और नई शुरुआत से बचें।
ग्रहण मेहनत, साहस और छोटी यात्राएँ पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।
क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।
- 30 अगस्त 2011
वक्री: 30 अगस्त 2011: गुरु मेष राशि में, आपके पहले भाव में वक्री होता है। नई शुरुआत के बजाय समीक्षा का समय।
गुरु आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास पर धीमा होता है, इसलिए इस क्षेत्र की पुरानी बातें दोबारा सामने आती हैं।
क्या करें: कुछ नया शुरू करने के बजाय पुराना काम दोहराएँ, सुधारें और पूरा करें।
- 15 नवंबर 2011
राशि परिवर्तन: 15 नवंबर 2011: शनि तुला राशि में, आपके सातवें भाव में प्रवेश करता है।
शनि आपके लिए कठिन स्थान में आता है, जिसका असर साझेदारी और दूसरों से लेन-देन पर होता है।
क्या करें: इस तिथि से इस क्षेत्र में धीरे चलें और हामी भरने से पहले दोबारा जाँच लें।
- 25 नवंबर 2011
सूर्य ग्रहण: 25 नवंबर 2011: वृश्चिक राशि में, आपके आठवें भाव में सूर्यग्रहण। दिन शांति से बिताएँ और नई शुरुआत से बचें।
ग्रहण साझा धन और अचानक बदलाव पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।
क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।
- 10 दिसंबर 2011
चंद्र ग्रहण: 10 दिसंबर 2011: वृषभ राशि में, आपके दूसरे भाव में चंद्रग्रहण। दिन शांत रखें और बड़े फ़ैसलों से बचें।
ग्रहण धन, परिवार और वाणी पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।
क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।
- 26 दिसंबर 2011
मार्गी: 26 दिसंबर 2011: गुरु मेष राशि में, आपके पहले भाव में मार्गी होता है। रुके हुए काम फिर आगे बढ़ने लगते हैं।
गुरु आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास पर फिर आगे बढ़ता है, इसलिए यहाँ जो अटका था वह चलने लगता है।
क्या करें: रुका हुआ काम फिर शुरू करें, और हस्ताक्षर या शुरुआत से पहले एक-दो दिन रुकें।
ये बातें उन सभी पर लागू होती हैं जिनका चंद्रमा मेष राशि में है, और केवल प्रवृत्तियाँ बताती हैं। आपकी अपनी जन्म कुंडली, अपने भावों और दशाओं के साथ, अलग बात कह सकती है।
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