Bhavishya

सिंह (Leo) वार्षिक राशिफल 2009 - मिश्रित

सिंह चंद्र राशि का 2009 का वार्षिक राशिफल। साल का रूप मुख्य रूप से धीमे ग्रह तय करते हैं: गुरु, शनि, राहु और केतु, और साल के ग्रहण। यहाँ हर एक को उसकी तिथियों के साथ आपकी चंद्र राशि से पढ़ा गया है।

यह साल मिला-जुला है: कुछ काम आसानी से चलते हैं और कुछ में धैर्य चाहिए। जो चल रहा है उस पर भरोसा रखें और धीमे कामों को एक-एक कदम लें।

साल कैसा रहेगा

  1. साल का पहला भाग: 1 जनवरी से 30 जून

    मिश्रित

    यह समय आसानी और धीमी गति का मेल है।

    गुरु यहाँ आपके पक्ष में काम करता है और साझेदारी और दूसरों से लेन-देन में मदद करता है।

    शनि, गुरु और केतु कहते हैं कि आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ-साथ रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम में सावधानी से चलें।

    राहु रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम में मदद करना चाहता है, पर अभी रुका हुआ है, इसलिए नतीजे धीरे आएँगे।

    26 जनवरी, 1 मई, 17 मई और 15 जून के आसपास बदलाव आता है; नीचे ध्यान देने योग्य तिथियाँ देखें।

  2. साल का दूसरा भाग: 1 जुलाई से 31 दिसंबर

    मिश्रित

    यह समय आसानी और धीमी गति का मेल है।

    गुरु यहाँ आपके पक्ष में काम करता है और साझेदारी और दूसरों से लेन-देन में मदद करता है।

    शनि, गुरु, राहु और केतु कहते हैं कि आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ-साथ धन, परिवार और वाणी में सावधानी से चलें।

    राहु और केतु रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम के साथ-साथ आय, लाभ और मित्र में मदद करना चाहते हैं, पर अभी रुके हुए हैं, इसलिए नतीजे धीरे आएँगे।

    22 जुलाई, 30 जुलाई, 10 सितंबर, 13 अक्टूबर, 17 नवंबर और 20 दिसंबर के आसपास बदलाव आता है; नीचे ध्यान देने योग्य तिथियाँ देखें।

शनि आपके पहले भाव में

सावधानी

शनि 10 सितंबर 2009 तक सिंह राशि में है।

शनि मेहनत, अनुशासन, कर्तव्य और धैर्य का प्रतीक है। वह लगातार मेहनत का फल देता है और शॉर्टकट को धीमा करता है।

आपकी अपनी राशि में शनि भारी ज़िम्मेदारियाँ और धीमी प्रगति लाता है। नियमित दिनचर्या रखें और बड़े फ़ैसलों में जल्दबाज़ी न करें।

आपके लिए इसका अर्थ

  • आप: मन और ऊर्जा कम हो सकते हैं; अच्छा आराम करें और जल्दबाज़ी में प्रतिक्रिया न दें।

शनि आपके दूसरे भाव में

सावधानी
जीवन के क्षेत्र:धनपरिवार और घर

शनि 10 सितंबर 2009 को कन्या राशि में प्रवेश करता है।

शनि मेहनत, अनुशासन, कर्तव्य और धैर्य का प्रतीक है। वह लगातार मेहनत का फल देता है और शॉर्टकट को धीमा करता है।

दूसरे भाव में शनि पैसों में तंगी और पारिवारिक रिश्तों में खिंचाव ला सकता है। सोच-समझकर खर्च करें और नरमी से बोलें।

आपके लिए इसका अर्थ

  • धन: खर्च बढ़ सकता है; बड़ी ख़रीद, उधार देने और जोखिम भरे दाँव से बचें।
  • परिवार और घर: घर में छोटी-मोटी खटपट संभव है; धैर्य और मीठे शब्द काम आते हैं।

गुरु आपके छठे भाव में

सावधानी
जीवन के क्षेत्र:करियर

गुरु 1 मई 2009 तक मकर राशि में है।

गुरु विकास, ज्ञान, मार्गदर्शन, सौभाग्य, संतान और शिक्षकों का प्रतीक है। साल का सबसे बड़ा सहायक यही है।

छठे भाव में गुरु प्रतिद्वंद्वी और रुके काम या कर्ज़ का दबाव ला सकता है। उधार देने से बचें और अपनी बात पर टिके रहें।

आपके लिए इसका अर्थ

  • करियर: काम पर दबाव या खींचतान बढ़ सकती है; जो शुरू किया है उसे पूरा करें और शांत रहें।

गुरु आपके सातवें भाव में

शुभ
जीवन के क्षेत्र:रिश्ते

गुरु 1 मई 2009 से 30 जुलाई 2009 तक कुंभ राशि में है।

गुरु विकास, ज्ञान, मार्गदर्शन, सौभाग्य, संतान और शिक्षकों का प्रतीक है। साल का सबसे बड़ा सहायक यही है।

सातवें भाव में गुरु विवाह, साझेदारी और अच्छी संगति के लिए अनुकूल है। समझौतों और यात्रा के लिए सहायक समय है।

आपके लिए इसका अर्थ

  • रिश्ते: गर्मजोशी और सहजता; लोगों से मिलने और मनमुटाव दूर करने का अच्छा समय।

गुरु आपके छठे भाव में

सावधानी
जीवन के क्षेत्र:करियर

गुरु 30 जुलाई 2009 से 20 दिसंबर 2009 तक मकर राशि में है।

गुरु विकास, ज्ञान, मार्गदर्शन, सौभाग्य, संतान और शिक्षकों का प्रतीक है। साल का सबसे बड़ा सहायक यही है।

छठे भाव में गुरु प्रतिद्वंद्वी और रुके काम या कर्ज़ का दबाव ला सकता है। उधार देने से बचें और अपनी बात पर टिके रहें।

आपके लिए इसका अर्थ

  • करियर: काम पर दबाव या खींचतान बढ़ सकती है; जो शुरू किया है उसे पूरा करें और शांत रहें।

गुरु आपके सातवें भाव में

शुभ
जीवन के क्षेत्र:रिश्ते

गुरु 20 दिसंबर 2009 को कुंभ राशि में प्रवेश करता है।

गुरु विकास, ज्ञान, मार्गदर्शन, सौभाग्य, संतान और शिक्षकों का प्रतीक है। साल का सबसे बड़ा सहायक यही है।

सातवें भाव में गुरु विवाह, साझेदारी और अच्छी संगति के लिए अनुकूल है। समझौतों और यात्रा के लिए सहायक समय है।

आपके लिए इसका अर्थ

  • रिश्ते: गर्मजोशी और सहजता; लोगों से मिलने और मनमुटाव दूर करने का अच्छा समय।

राहु आपके छठे भाव में

रुका हुआ
जीवन के क्षेत्र:करियर

राहु 17 नवंबर 2009 तक मकर राशि में है।

राहु महत्वाकांक्षा, और पाने की भूख, नए और अनोखे का प्रतीक है। वह अचानक अवसर और बेचैनी ला सकता है।

छठे भाव में राहु प्रतिद्वंद्वियों को हराने और प्रतिस्पर्धा संभालने में मदद करता है। साहसी काम सफल होता है।

फ़िलहाल मंगल राहु के शुभ फल में बाधा (वेध) डाल रहा है, इसलिए साहसी कदमों में सफलता से पहले अतिरिक्त सावधानी चाहिए।

आपके लिए इसका अर्थ

  • करियर: साथ तो है, पर पहचान उम्मीद से धीरे मिलती है।

राहु आपके पाँचवें भाव में

सावधानी
जीवन के क्षेत्र:पढ़ाईरिश्ते

राहु 17 नवंबर 2009 को धनु राशि में प्रवेश करता है।

राहु महत्वाकांक्षा, और पाने की भूख, नए और अनोखे का प्रतीक है। वह अचानक अवसर और बेचैनी ला सकता है।

पाँचवें भाव में राहु पढ़ाई, प्रेम और निवेश में निर्णय को भटका सकता है। सट्टे से बचें।

आपके लिए इसका अर्थ

  • पढ़ाई: ध्यान बिखर सकता है; एक समय में एक विषय लें और अच्छे से दोहराएँ।
  • रिश्ते: ग़लतफ़हमी आसानी से हो सकती है; ज़्यादा सुनें और दूसरों को जगह दें।

केतु आपके बारहवें भाव में

सावधानी
जीवन के क्षेत्र:आध्यात्मिक जीवनधन

केतु 17 नवंबर 2009 तक कर्क राशि में है।

केतु छोड़ने, वैराग्य और भीतर के जीवन का प्रतीक है। वह शांत समझ और सांसारिक बातों से दूर होने का खिंचाव ला सकता है।

बारहवें भाव में केतु साधना और मोह छोड़ने के लिए अनुकूल है। खर्च पर नज़र रखनी होगी।

आपके लिए इसका अर्थ

  • आध्यात्मिक जीवन: मन उदास या अशांत लग सकता है; शांत दिनचर्या और प्रार्थना मन को स्थिर करती है।
  • धन: खर्च बढ़ सकता है; बड़ी ख़रीद, उधार देने और जोखिम भरे दाँव से बचें।

केतु आपके ग्यारहवें भाव में

रुका हुआ
जीवन के क्षेत्र:धन

केतु 17 नवंबर 2009 को मिथुन राशि में प्रवेश करता है।

केतु छोड़ने, वैराग्य और भीतर के जीवन का प्रतीक है। वह शांत समझ और सांसारिक बातों से दूर होने का खिंचाव ला सकता है।

ग्यारहवें भाव में केतु लाभ और अप्रत्याशित जगहों से मदद लाता है। इच्छाएँ चुपचाप पूरी हो सकती हैं।

फ़िलहाल बुध केतु के शुभ फल में बाधा (वेध) डाल रहा है, इसलिए मेहनत के नतीजे दिखने में अधिक समय लग सकता है।

आपके लिए इसका अर्थ

  • धन: लाभ संभव है, पर देरी की संभावना है; अभी उस पर भरोसा न करें।

शनि, साढ़ेसाती और ढैय्या

साढ़े साती - मध्य चरणसाढ़े साती - अंतिम चरण

शनि आपकी अपनी राशि में है: साढ़ेसाती का बीच का और सबसे भारी चरण। प्रगति धीमी रहती है और कर्तव्य भारी लगते हैं; नियमित दिनचर्या और धैर्य आपको पार ले जाते हैं।

शनि आपके दूसरे भाव में है: साढ़ेसाती का अंतिम चरण। परिवार और पैसों के मामलों में सावधानी चाहिए, और चरण आगे बढ़ने के साथ दबाव घटने लगता है।

इस साल का उपाय

उन ग्रहों के लिए छोटे, स्वैच्छिक अभ्यास जो इस साल सबसे ज़्यादा सावधानी माँगते हैं। इनमें कोई ख़र्च नहीं है और ये किसी ख़ास नतीजे का वादा नहीं करते; जो ठीक लगे वही अपनाएँ।

शनि के लिए, शनिवार को सबसे अच्छा

शनि आपके लिए कठिन स्थान में है, जिसका असर आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास पर है।

  • बुज़ुर्गों या कड़ी शारीरिक मेहनत करने वालों की, जैसे भी हो सके, मदद करें।
  • मान लें कि कुछ नतीजे धीरे आते हैं; रफ़्तार पर ज़ोर डाले बिना आगे बढ़ते रहें।

केतु के लिए, मंगलवार को सबसे अच्छा

केतु आपके लिए कठिन स्थान में है, जिसका असर खर्च, आराम और भीतर का जीवन पर है।

  • रोज़ थोड़ी देर ध्यान या प्रार्थना का नियम रखें।
  • जहाँ हो सके, जीवन को सरल बनाएँ; जो अब काम का नहीं रहा, उसे छोड़ दें।

ध्यान देने योग्य तिथियाँ

  • 26 जनवरी 2009

    सूर्य ग्रहण: 26 जनवरी 2009: मकर राशि में, आपके छठे भाव में सूर्यग्रहण। दिन शांति से बिताएँ और नई शुरुआत से बचें।

    ग्रहण रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।

    क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।

  • 1 मई 2009

    राशि परिवर्तन: 1 मई 2009: गुरु कुंभ राशि में, आपके सातवें भाव में प्रवेश करता है।

    गुरु आपके लिए सहायक स्थान में आता है, जो साझेदारी और दूसरों से लेन-देन को सहारा देता है।

    क्या करें: इसके बाद के दिनों में इस क्षेत्र में योजनाएँ शुरू करें या आगे बढ़ाएँ।

  • 17 मई 2009

    मार्गी: 17 मई 2009: शनि सिंह राशि में, आपके पहले भाव में मार्गी होता है। रुके हुए काम फिर आगे बढ़ने लगते हैं।

    शनि आपकी ऊर्जा और आत्मविश्वास पर फिर आगे बढ़ता है, इसलिए यहाँ जो अटका था वह चलने लगता है।

    क्या करें: रुका हुआ काम फिर शुरू करें, और हस्ताक्षर या शुरुआत से पहले एक-दो दिन रुकें।

  • 15 जून 2009

    वक्री: 15 जून 2009: गुरु कुंभ राशि में, आपके सातवें भाव में वक्री होता है। नई शुरुआत के बजाय समीक्षा का समय।

    गुरु साझेदारी और दूसरों से लेन-देन पर धीमा होता है, इसलिए इस क्षेत्र की पुरानी बातें दोबारा सामने आती हैं।

    क्या करें: कुछ नया शुरू करने के बजाय पुराना काम दोहराएँ, सुधारें और पूरा करें।

  • 22 जुलाई 2009

    सूर्य ग्रहण: 22 जुलाई 2009: कर्क राशि में, आपके बारहवें भाव में सूर्यग्रहण। दिन शांति से बिताएँ और नई शुरुआत से बचें।

    ग्रहण खर्च, आराम और भीतर का जीवन पर पड़ता है, जिससे यह कुछ दिनों के लिए नाज़ुक जगह बन जाती है।

    क्या करें: दिन शांत रखें और नई शुरुआत, बड़ी ख़रीद और हस्ताक्षर से बचें।

  • 30 जुलाई 2009

    राशि परिवर्तन: 30 जुलाई 2009: गुरु मकर राशि में, आपके छठे भाव में प्रवेश करता है।

    गुरु आपके लिए कठिन स्थान में आता है, जिसका असर रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम पर होता है।

    क्या करें: इस तिथि से इस क्षेत्र में धीरे चलें और हामी भरने से पहले दोबारा जाँच लें।

  • 10 सितंबर 2009

    राशि परिवर्तन: 10 सितंबर 2009: शनि कन्या राशि में, आपके दूसरे भाव में प्रवेश करता है।

    शनि आपके लिए कठिन स्थान में आता है, जिसका असर धन, परिवार और वाणी पर होता है।

    क्या करें: इस तिथि से इस क्षेत्र में धीरे चलें और हामी भरने से पहले दोबारा जाँच लें।

  • 13 अक्टूबर 2009

    मार्गी: 13 अक्टूबर 2009: गुरु मकर राशि में, आपके छठे भाव में मार्गी होता है। रुके हुए काम फिर आगे बढ़ने लगते हैं।

    गुरु रोज़ का काम, प्रतिद्वंद्वी और अटके काम पर फिर आगे बढ़ता है, इसलिए यहाँ जो अटका था वह चलने लगता है।

    क्या करें: रुका हुआ काम फिर शुरू करें, और हस्ताक्षर या शुरुआत से पहले एक-दो दिन रुकें।

  • 17 नवंबर 2009

    राशि परिवर्तन: 17 नवंबर 2009: राहु धनु राशि (आपके पाँचवें भाव) में और केतु मिथुन राशि (आपके ग्यारहवें भाव) में प्रवेश करता है।

    राहु-केतु की जोड़ी आगे बढ़ती है, जिससे बदलता है कि आप कहाँ बेचैनी महसूस करते हैं (पढ़ाई, संतान और रचनात्मक योजनाएँ) और कहाँ आपसे छोड़ने को कहा जाता है (आय, लाभ और मित्र)।

    क्या करें: ख़ुद को सँभलने का समय दें और इसके आसपास के हफ़्तों में अचानक बड़े बदलावों से बचें।

  • 20 दिसंबर 2009

    राशि परिवर्तन: 20 दिसंबर 2009: गुरु कुंभ राशि में, आपके सातवें भाव में प्रवेश करता है।

    गुरु आपके लिए सहायक स्थान में आता है, जो साझेदारी और दूसरों से लेन-देन को सहारा देता है।

    क्या करें: इसके बाद के दिनों में इस क्षेत्र में योजनाएँ शुरू करें या आगे बढ़ाएँ।

ये बातें उन सभी पर लागू होती हैं जिनका चंद्रमा सिंह राशि में है, और केवल प्रवृत्तियाँ बताती हैं। आपकी अपनी जन्म कुंडली, अपने भावों और दशाओं के साथ, अलग बात कह सकती है।

इस राशि के लिए और | सभी 12 राशियाँ

सभी फलादेश और परिणाम सांकेतिक हैं, जो चंद्र राशि और शास्त्रीय नियमों से हमारी गणनाओं में यथासंभव सावधानी से निकाले गए हैं। ये व्यक्तिगत फलादेश नहीं हैं, न ही चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह, और इन पर लिए गए निर्णयों की कोई ज़िम्मेदारी यह वेबसाइट या इसके पीछे का व्यवसाय नहीं लेता। इन भविष्यवाणियों का उपयोग कैसे करें, यह पढ़ें।